नई दिल्ली. म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार और पड़ोसी देशों में उनके पलायन के बाद चौतरफा आलोचना झेल रही स्टेट काउंसलर आंग सान सू की ने अपनी चुप्पी तोड़ी है.
नाय पीय ताव में आयोजित ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ के भाषण में उन्होंने सरकार और सेना के उच्च अधिकारियों के बीच कहा कि हमें इस बात की खबर है कि पूरी दुनिया की नजर हमारे ऊपर है. उन्होंने अपने भाषण में कहा कि हम अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं आयेंगे. अपने भाषण में उन्होंने सैन्य कार्यवाही को भी सही ठहराया है.
मानवाधिकार के मुद्दे पर अपना बचाव करते हुए सू की ने कहा कि मानवाधिकार का उल्लंघन सही नहीं है लेकिन उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों के एक गुट पर आतंकी घटनाओंं में शामिल रहने का आरोप लगाया. मालूम हो कि इससे पूर्व उन्होंने रोहिंग्या संकट को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की आमसभा में भाग लेने से मना कर दिया था. इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने बैठक से पूर्व कहा था कि सू की के पास हिंसा रोकने का यह आखिरी मौका है. महासचिव ने कहा था कि रोहिंग्या मुसलमानों की घर वापसी म्यांमार सरकार की जिम्मेदारी है.
संयुक्त राष्ट्र के द्वारा रोहिंग्या संकट को ‘नस्ली नरसंहार का उदाहरण’ बताने के बाद यह पहली बार है जब सू की ने इस मुद्दे पर बोला है. उनका पूरा भाषण अंग्रेजी में था. सू की अपने पूरे भाषण में रोहिंग्या शब्द बोलने से बचती रहीं. उन्होंने उनके लिए मुसलमान और मुसलमान गुटों का प्रयोग किया.
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सू की ने कहा कि अाधी शताब्दी तक सैन्य शासन के बाद हम राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में हैं. उन्होंने कहा कि “वे वास्तविक कारणों का पता लगा रही हैं.” उन्होंने कहा, “यह पलायन क्यों हो रहा है? मैं उनसे बात करना चाहती हूं जो यहां से जा चुके हैं और उनसे भी जो यहां बने हुए हैं.”
गौरतलब है कि अगस्त के बाद से चार लाख से अधिक लोग म्यांमार से पलायन कर चुके हैं. अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय म्यांमार के उत्तरी क्षेत्र की रखाइन प्रांत में 12वीं शताब्दी से रहते आये हैं.