ज्वालामुखी (कांगड़ा). जिला कांगडा के अन्तर्गत छतर गांव में एक मासूम दिव्यांग बच्चे की हालत ने उसके माता-पिता को इस कदर झकझोर दिया कि उन्होंने अपने घर में दिव्यांग आश्रम बनाने का फैसला ले लिया है .
छतर गांव के संजीव कुमार का एक 5 साल का बेटा है जोकि पूरी तरह से गुंगा बहरा है तथा पूरी तरह से अपाहिज अवस्था में है. हमेशा बिस्तर पर लेटा रहता है. बेटे की इस हालत से प्ररेणा लेकर नीरज कुमार ने गांव में एक दिव्यांग आश्रम बनाना शुरू कर दिया है. ताकि उनके बच्चे जैसे अन्य गरीब दिव्यांग व अनाथ बच्चों को इलाज व अन्य सुविधा मिल सके.
वहीं, दिव्यांग बच्चे की दादी का कहना है कि यह भगवान की माया है, उन्हें अपने पोते की हालत का बहुत गम है. लेकिन वह पोते के गम को अन्य दिव्यांग बच्चों की सेवा करके मिटाना चाहती है. इसके लिए उन्हेंने अपने घर को दिव्यांग आश्रम बनाया है. इसमें करीब 20 कमरे बनाए जा रहे है. अभी तक इलाके के 40 दिव्यांग बच्चों का चयन किया गया गया. जिन्हें इस आश्रम में रखा जाएगा. उनको इलाज व रहने खाने की फ्री सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी.
उन्हेंने बताया कि फिलहाल इस आश्रम का सारा खर्चा उसके बेटा व बहु अपने वेतन से ही वहन करेगें. सरकार व प्रशासन को इस बारे अवगत करवाया गया है. लेकिन अभी तक उन्हें सरकार से कोई भी सहायता राशि नहीं मिली है. लिहाजा यह कहना उचित होगा कि यह मासूम बच्चा इलाके के अन्य दिव्यांग व अनाथ बच्चों के लिए मसीहा बनकर उभरा है.