नई दिल्ली. ठंड की एक रात जब आप अपने घरों में, गर्म कपड़े पहन कर, गर्म कंबल में सो रहे हों तो एक बात सोचिएगा. सोचिएगा कि वो लोग जो मौसम से बेपरवाह होकर सरहद पर दिनरात खड़े हैं, वहां न खड़े हों तो क्या? क्या हो अगर दुश्मन की गोलियों को सीने पर झेलकर वो हमें महफूज न रखें, क्या हो अगर देश में घुसने वाले दुश्मन के दांत खट्टे करने वाला कोई न हो?
देश में स्वराज और लोकतंत्र की स्थापना में इन सशस्त्र बलों का योगदान इसीलिए सबसे ऊपर माना जाना चाहिए. और इसीलिए इन सशस्त्र प्रहरियों के सम्मान में मनाया जाता है झंडा दिवस.
क्यों मनाया जाता है झंडा दिवस ?
ठीक आज ही के दिन 1949 से झंडा दिवस मनाने की शुरुआत हुयी. इसका उद्देश्य था
सेनाओ का सम्मान करना जो देश की सुरक्षा और आजादी में शहीद हुये हमारे देश की युद्ध
वीरांगनाओ, भूतपूर्व सैनिक और युद्ध में अपंग हुए सैनिको व उनके परिवार के मदद के रूप
में की जाती है.
सेना में रहकर जिन्होंने न केवल सीमओं की रक्षा की, बल्कि आतंकवाद व उग्रवादी से
मुकाबला कर शांति स्थापित करने में अपनी जान न्योछावर कर दी. झंडा दिवस उन जाबांज
सैनिको के प्रति एकजुटता दिखाने का दिन है जो साल में एक बार आता है.

इस दिन को ध्यान में रखते हुए ‘रक्षा मंत्रालय’ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके 01 दिसम्बर से 07 दिसम्बर तक ‘सशस्त्र सेना सप्ताह’ के रूप में मनाये जाने का आह्वान उसके
साथ ही नागरिकों से अपील की इस सप्ताह में झंडा दिवस के बैनर तले सेना को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रोत्साहित किया इसके साथ कैशलेस माध्यम को बढ़ावा देने किये लिए
और सहायता करने वाले नागरिकों को आसानी हो इसके लिए दो प्लेटफार्म बताये गए हैं
जिसमे से एक है PAYTM और दूसरा भारत सरकार की एप्लीकेशन भीम. जिसकी मदद से
आप आसानी से ‘सशस्त्र झंडा दिवस’ में आर्थिक भागीदारी कर सके. जिन नागरिकों ने इसमें योगदान दिया उनको ‘रक्षा मंत्रालय’ द्वारा प्रशस्ति पत्र भी ईमेल और डाक द्वारा भेजा गया.
तीन कलर का झंडा हमारे देश को परिभाषित करता है और उसकी एकता और अखंडता का प्रतीक भी माना जाता है. इस तरह के कार्यक्रम में हर एक भारतीय को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए आपके एक कदम से हमारी सेना को आर्थिक और मानसिक मजबूती भी मिलेगी.

