हिमाचल: शानन और बस्सी पनबिजली परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन घटने से हिमाचल प्रदेश और पंजाब में बिजली संकट की आशंका बन गई है. इस माह 110 मेगावाट की शानन परियोजना में 20 मेगावाट विद्युत उत्पादन ही हो सका. इसी तरह 66 मेगावाट की बस्सी परियोजना से सिर्फ आठ मेगावाट बिजली तैयार हुई.
क्या है पूरा मामला?
पहाड़ों पर बर्फबारी और ग्लेशियरों के जम जाने से मंडी जिले के बरोट स्थित प्रोजेक्टों की पुरानी और नई रेजरवायर में अचानक पानी की गिरावट से दोनों परियोजना में विद्युत उत्पादन लुढ़क गया है. इससे दोनों ही परियोजनाओं को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा है. अगर ऐसा ही रहा तो हिमाचल प्रदेश और पंजाब में बिजली संकट गहरा जाएगा.
यहां पर 15 मेगावाट की चार और 50 मेगावाट की एक मशीन से 110 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता था, लेकिन इन दिनों बड़ी मुश्किल से 20 मेगावाट ही विद्युत उत्पादन हो रहा है. शानन परियोजना के एसई अजीत कुमार ने बताया कि बरोट स्थित परियोजना की रेजरवायर में पानी न पहुंचने से विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है. वहीं, बस्सी परियोजना के आरई अरुण धीमान ने बताया कि ग्लेशियर जमने से रेजर वायर में पानी कम हुआ है, जिस कारण विद्युत उत्पादन घट रहा है. बस्सी परियोजना में सालाना सौ करोड़ रुपये की आमदनी होती है.
रेजरवायर में पानी की आवक कम होने के कारण विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है
शानन परियोजना के अधीक्षण अभियंता अजीत कुमार ने कहा किबरोट स्थित परियोजना की रेजरवायर में पानी की आवक कम होने के कारण विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है. तय लक्ष्य को फिर भी पूरा किया जा रहा है. शानन विद्युत परियोजना में पानी की प्रचुर मात्रा होने पर 110 मेगावाट का उत्पादन होता है, लेकिन इन दिनों 60 मेगावाट उत्पादन हो रहा है. वहीं बस्सी परियोजना जोगेंद्रनगर के आरई अरुण धीमान ने कहा कि ग्लेशियर जम जाने से रेजरवायर में पानी में कमी आई है. परियोजना में विद्युत उत्पादन कम हो रहा है. परियोजना में इन दिनों 17 मेगावाट तक विद्युत उत्पादन हो रहा है.